क्या आपण जाणते हे? 1 किलोमीटर पटरी बिछाने में लगते हैं कितने करोड़ रुपए?

जैसा कि हम सब ने अपनी जिंदगी में कभी ना कभी एक बारी यह जरूर सोचा होगा कि इंडियन रेलवे में 1 किलोमीटर लंबी पटड़ी बिछाने में कितने रुपए का खर्चा आता होगा। लेकिन एकदम सही रकम का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल है। क्योंकि पटरी को बिछाने का खर्च बहुत सारे फैक्टरस पर डिपेंड करता है। जैसे कि वह किस लोकेशन में बिछाई जा रही है, वह किस रूट पर बिछाई जा रही है और वह रूट कितना जरूरी है। और उसे बिछाने में कौन-कौन सी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल हुई है।

पहले 1 किलोमीटर पटरी बिछाने में कितने रुपए लगते हैं: पहले के समय की बात करी जाए तो 1 किलोमीटर पटरी को बिछाने का कोस्ट काफी कम हुआ करता था। क्योंकि उस वक्त सिर्फ आयरन  यानी कि लोहै का इस्तेमाल होता था। उस वक्त 1 किलोमीटर  पटरी मात्र 50 से 80 लाख में तैयार हो जाती थी। पर इससे यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि वह पटरी अगर क्वालिटी के मामले में देखा जाए तो काफी खराब होती होगी। उसे जल्दी जर लग जाता है। उसमे आसानी से टूट जाने या बड़े हो जाने  की संभावना होती है।

अब 1 किलोमीटर पटरी बिछाने में कितना खर्च होता है?: अब अगर बात की जाए, आज के रेलवे ट्रेक्स की तो यह 7 से 10 करोड़ के खर्च में 1 किलोमीटर तक बन जाते हैं। इनमें आयरन के साथ कई और एलिमेंट्स भी इस्तेमाल किए जाते हैं। जिसकी वजह से इसका खर्च बढ़ जाता है। और इन एलिमेंट के कारण ट्रैक्स की ताकत या कहें तो डयूरेबिलिटी बढ़ जाती है। और वह लंबे समय तक चलती है। ट्रैक का खर्चा सिर्फ उसमें इस्तेमाल हो रहे एलिमेंटस पर ही डिपेंड नहीं करता है, बल्कि ट्रैक के वजन पर भी डिपेंड करता है। अगर हम आजकल की साधारण ट्रैक की बात करें तो उसमें एक सिंगल रेल का वजन 35 से 45 किलो के बीच होता है। और यह वजन सिर्फ 1 मीटर का होता है। जिससे यह साफ कहा जा सकता है कि अगर वजन ज्यादा है तो खर्च भी ज्यादा होगा।

बुलेट ट्रेन के 1 किलोमीटर ट्रैक को बनाने में कितना खर्च आता है: बुलेट ट्रेन के 1 किलोमीटर ट्रक को बनाने में 90 से 100 करोड़ रुपए लग जाते हैं। बुलेट ट्रेन का ट्रैक साधारण ट्रक से 7 से 10 गुना तक अच्छी क्वालिटी का होता है। और उतना ही महंगा होता है इसी कारण इसको 1 किलोमीटर मात्र बिछाने में 80 से 100 करोड़ रुपए लग जाते हैं। बुलेट ट्रेन वैसे तो भारत के नॉर्मल ट्रैक पर भी दौड़ सकती है लेकिन यह सिर्फ कुछ ही रूट पर संभव होगा और वह भी मात्र 150 से 175 की गति से भाग सकती हैं। भारत के रेलवे ट्रैक इतनी अच्छी क्वालिटी के नहीं है जो 300 से ज्यादा गति को झेल पाए। रेल की पटरी को बिछाने में कितना खर्च आएगा उस जगह की लोकेशन पर भी डिपेंड करता है। मान लीजिए अगर ट्रैक किसी साधारण प्लेन जमीन पर बिछाना है तो वहां खर्चा कम आएगा और अगर किसी ऊंची-नीची जमीन पर बिछाना है तो वहां अवश्य ही खर्चा ज्यादा है।