रावण का अनदेखा और अनसुना सच || रामायण में राम और रावण के बारे में कुछ रोचक तथ्य !!

हम सभी ने रामायण एक बार अपनी जिंदगी में सुनी, देखी या पढ़ी होगी। और हम सब का यह ही मानना है कि रावण एक खलनायक हैं। हम तो उसी रावण को जानते है जिसने सिता मया का अपहरण किया था और जिसने राम भगवान के खिलाफ युद्ध में लगे थे। पर हम क्यो रावण को एक दष्ट और अहंकारी के रूप में देखते हैं जबकि आज तक इतिहास में रावण जैसा शक्तिशाली और बुद्धिमान जीवी को शायद ही हमने कभी देखा होगा। तो आज में आपको कुछ ऐसी बातें बताने वाली हूं जो शायद ही आप को पता होगी। रावण के पिता मशहूर रीशी , विश्रवास जिनके पिता खुद प्रजापति पुलतस्य थे जो कि ब्रह्मा के दस मन-पैदा होने वाले बच्चों में से थे।

रावण के पिता, विश्रवा एक ब्राह्मन थे और उनकी माता,कैकेसी एक दैत्य थी इसलिए वे आधे ब्राह्मण और आधे दैत्य थे। इसके बावजूद रामा ने रावण की प्रशंसा एक महाब्राह्मन कह कर की। राम ने जब सेतु निर्माण किया तब उसकी पूजा रावण ने ही की थी और उसने राम भगवान और उनकी सेना को आशीर्वाद भी दिया क्योंकि उस समय वे ही सबसे ज्ञानिय पंडित थे। यह भी माना जाता है कि उन्होंने एक शुभ समय युद्ध की शुरुआत के लिए भी बताया और राम को विजय भव: कहकर आशीर्वाद भी दिया। मरते वक्त रावण ने लक्ष्मण को बहुत ज्ञान दिया। क्योंकि रावण विद्वानों में से एक थे, राम ने लक्ष्मण को रावण के पास बैठकर उससे राज्य और कूटनीति के बारे में सीखने को कहा।

रावण ने लक्ष्मण को बहुत ज्ञान दिया और यह भी कहा कि अपने सारथी, रसोइया, द्वारपाल और अपने भाईयों से हमेशा अच्छे संबंध रखने चाहिए। यह भी माना जाता है कि उन्हें संगीत का बहुत शौक है। उन्होंने अपना खुद का संगीत का उपकरण भी बनाया था जिसका नाम वीना रखा गया। और उन्होंने शिव तांडव की भी रचना की, भगवान शिव के लिए। वे एक बहुत ही अच्छे पुत्र भी थे। वे अपनी माता के लिए कैलाश गए, आत्म लिंगम या भगवान शिव को लाने के लिए ताकि उनकी माता आसानी से पूजा कर सके। जब वे लेने जा रहे थे तब शिव क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपना पैर रावण के उपर रख दिया। शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की। वे एक बहुत अच्छे पति भी थे ।

उन्होंने अपनी यज्ञ को अधुरा छोड़ के चले गए। रावण को डर था जब राम की सेना ने उनकी सेना को बरबाद कर दिया था तभी उन्होंने यज्ञ करने का सोचा। यज्ञ के दौरान उनको उठने की अनुमति नहीं थी। इसे देख राम ने अंगद को यज्ञ बाधित करने के लिए भेजा। पर रावण पर इसका कोई असर नहीं पड़ा इसलिए अंगद ने रावण की बीवी मंडादूरी को लेकर जा रहा था और जब उससे और सहा नहीं जा रहा था तब वह उठ गया। वे एक बहुत अच्छे बाई भी थे। उन्होंने अपनी बहन सूर्पनखा के अपमान का बदला लेने के लिए इतना बड़ा फैसला लिया जो उनकी मृत्यु का कारण भी बन गया। और जब कुम्भकरण को ब्राह्म जी ने हमेशा के लिए नींद में सोने का वरदान दिया था तब रावण ने तपस्या करके उसे 6 महीने का कराया था । कई सालों की तपस्या के साथ वे इतने शक्तिशाली बन गए थे कि वे सूर्योदय और सूर्यास्त को नियंत्रित कर सकता था। जब उनके पुत्र, मेघनाद का जन्म हुआ तब उन्होंने ग्रहों को उनके पुत्र के 11वें घर में रहने का निर्देश दिया, जिससे उनके पुत्र को अमरता प्रदान होगा।

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