आखिर लाल चींटी ही क्यों काटती है, जानिए, काली क्यों नहीं

दोस्तों अपने चीटियों की एक चीज तो जरूर देखी होगी कि वह हमेशा एक कतार में और एक झुंड में रहती हैं। चीटियों की अलग-अलग कॉलोनी होती हैं। हर चींटी अपनी कॉलोनी में ही रहती है तथा वह अपनी कॉलोनी को बहुत ही आसानी से पहचान लेती है। कोई भी चींटी अपनी कॉलोनी को छोड़कर दूसरी कॉलोनी में नहीं जाकर मिलती है।

आपने अभी देखा होगा कि चीटियां दो तरह की होती हैं एक जो दिखने में आधी लाल होती हैं और आधी काली वहीं दूसरी तरफ जो चींटी पूरी काली होती है। अगर कभी जिंदगी में अपने चींटी के काटने का अनुभव किया है। तो आपने यह बात जरूर नोटिस करी होगी कि हमेशा केवल लाल चींटी ही काटती है काली चींटी कभी नहीं काटती है। तो आज हम आपको इसका कारण बताएंगे कि लाल चींटी क्यों काटते हैं।

क्या आपने सोचा है कि लाल चींटी बदमाश होती है और काली चींटी शरीफ होती है। हा हा हा! ऐसा कुछ नहीं होता है।दरअसल चीटियों के शरीर के पिछले हिस्से में एसिड बनाने वाली ग्रंथियां होती हैं। इन्हीं ग्रंथियों के द्वारा सीटियां फार्मिक एसिड नामक एक एसिड का फॉर्मेशन करती हैं। जब चींटी काटती है तो अपने शरीर को टेढ़ा करके उस फॉर विक एसिड का विस्तर अब हमारे शरीर के अंदर भर देती है।

उस फॉमिक एसिड के कारण ही हमें जलन और खारिश होती है। कभी-कभी वहां पर सूजन भी आ जाती है। ठीक इसी प्रोसेस को फॉलो करते हुए लालबाग काली चींटी दोनों काटती है और एसिड को हमारे शरीर में डाल देती हैं। अब आप सोच रहे होंगे भैया कि हमें तो कभी काली चींटी ने काटा ही नहीं है।

दोस्तों ऐसा नहीं है काटती लाल और काली दोनों हैं। परंतु काली चींटी के एसिड में कम ताकत होती है इसलिए वह हमें महसूस नहीं होता है। तो आगे से दोस्त ध्यान रखिएगा लाल और काली दोनों ही चीटियां काटती है।